गम के आंसू खुशी में बदले! ‘पहाड़ी बाग’ के दरवाजे पहुंचे डीएफओ,
मुख्यमंत्री धामी के संज्ञान के बाद हरकत में आया प्रशासनअपनी पैतृक जमीन और पहाड़ की संस्कृति को बचाने में जुटे गिरीश पांडे की समस्याओं के समाधान का मिला भरोसा, बोले ‘पहाड़ी बाग’—धामी जी सबकी सुनते हैंबागेश्वर, उत्तराखंड। पहाड़ की संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गिरीश पांडे उर्फ ‘पहाड़ी बाग’ के लिए भावुक कर देने वाला पल सामने आया है। अपनी समस्याओं को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचाते हुए भावुक हुए पहाड़ी बाग के चेहरे पर उस समय खुशी लौट आई, जब मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद वन विभाग के अधिकारी उनके दरवाजे पर पहुंचे और उनकी समस्याओं को समझने के लिए खेतों का निरीक्षण किया।मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद जिला प्रशासन और वन विभाग की ओर से दिखाई गई तत्परता से पहाड़ी बाग को समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए समयबद्ध तरीके से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीमगिरीश पांडे ने दो दिन पूर्व अपनी समस्याओं को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचाया था। इस दौरान वह भावुक हो गए थे। मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और संबंधित क्षेत्र एवं खेतों का निरीक्षण किया।डीएफओ बागेश्वर प्रकाश चंद्र आर्य स्वयं पहाड़ी बाग के दरवाजे पर पहुंचे और उनकी समस्याओं को समझा। अधिकारियों की इस पहल से भावुक हुए गिरीश पांडे के चेहरे पर राहत और खुशी दिखाई दी। जिस पीड़ा को साझा करते समय उनकी आंखों में आंसू थे, वहीं समस्याओं के समाधान का भरोसा मिलने पर उनकी आंखों में खुशी झलकने लगी।पहाड़ी बाग ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “धामी जी सबकी सुनते हैं।”हंसी बांटने वाला ‘पहाड़ी बाग’ खुद था परेशान, अब जगी उम्मीदसोशल मीडिया पर लोगों को हंसाने और पहाड़ की खूबसूरती से रूबरू कराने वाले गिरीश पांडे की पहचान केवल एक इन्फ्लुएंसर के रूप में नहीं है। वह अपनी पैतृक जमीन से जुड़कर पर्वतीय जीवनशैली, पारंपरिक खान-पान, खेती-बागवानी और पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।आज जब बड़ी संख्या में लोग बेहतर रोजगार और सुविधाओं की तलाश में गांव छोड़कर शहरों की ओर जा रहे हैं, ऐसे समय में पहाड़ी बाग अपनी जड़ों से जुड़े रहकर गांव में ही संभावनाएं तलाशने की प्रेरणा दे रहे हैं। उनका प्रयास है कि पहाड़ की जमीन, संस्कृति और परंपराएं सुरक्षित रहें तथा स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर विकसित हों।ऐसे में उनकी समस्याओं पर अधिकारियों की पहुंच और समाधान का आश्वासन उनके लिए भावनात्मक राहत के साथ आगे बढ़ने की नई उम्मीद भी लेकर आया है।अंतिम छोर के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना जरूरी: डीएफओडीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने कहा कि सरकार की जनोपयोगी योजनाओं का लाभ समय रहते गांव के अंतिम व्यक्ति और किसान तक पहुंचाना आवश्यक है। विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को योजनाओं की जानकारी दें और पात्र व्यक्तियों को उनका लाभ दिलाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करें।उन्होंने बताया कि पहाड़ी बाग से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। आगामी एक से दो सप्ताह के भीतर संबंधित समस्याओं के निराकरण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया गया।सामूहिक खेती और सहकारिता से पहाड़ में बढ़ सकती हैं रोजगार की संभावनाएंमौके पर पहुंचे अधिकारियों ने पर्वतीय क्षेत्रों में सामूहिक खेती यानी कलेक्टिव फार्मिंग, खेती-बागवानी और सहकारिता के माध्यम से स्थानीय आजीविका को मजबूत करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।सहकारिता विभाग के सहकारी निरीक्षक वर्ग-2 विक्रम चंद ने ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता से जुड़ी गतिविधियों और सामूहिक प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि किसान और ग्रामीण उपलब्ध योजनाओं का लाभ लेकर मिल-जुलकर कार्य करें, तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और पलायन पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।निरीक्षण के दौरान ये अधिकारी रहे मौजूदमौके पर डीएफओ बागेश्वर प्रकाश चंद्र आर्य, रेंजर बागेश्वर-कपकोट नारायण पांडे, वन दरोगा रवि प्रसाद आर्य, तारा सिंह, प्रताप सिंह, मनोज कुमार आर्य, वन आरक्षी चंदन राम तथा सहकारिता विभाग के सहकारी निरीक्षक वर्ग-2 विक्रम चंद मौजूद रहे।अब समाधान की उम्मीद, पहाड़ से जुड़ाव की मुहिम को मिलेगा सहारा?पहाड़ी बाग का यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में जनसमस्याओं को सुनने, मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति समझने और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के महत्व को सामने लाता है। खासकर उन लोगों के लिए, जो अपनी पैतृक जमीन पर रहकर खेती-बागवानी, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद अधिकारियों की मौके पर पहुंच और समस्याओं के समाधान के आश्वासन से गिरीश पांडे ने राहत महसूस की है। अब उम्मीद है कि संबंधित समस्याओं का निर्धारित समय में प्रभावी निराकरण होगा और पहाड़ी बाग अपनी जमीन, पहाड़ की संस्कृति तथा ग्रामीण जीवन को संवारने के प्रयासों को आगे बढ़ा सकेंगे!
kamal bhandari editor in chief.

