घुरचुम के बैड़ा गटला तोक में जंगली सूअरों का आतंक, 10 नाली फसल बर्बाद

घुरचुम के बैड़ा गटला तोक में जंगली सूअरों का आतंक, 10 नाली फसल बर्बाद

किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, जिला प्रशासन से मुआवजे और डेढ़ किलोमीटर तारबाड़ लगाने की मांगघुरचुम (बैड़ा गटला): ग्राम पंचायत घुरचुम के बैड़ा गटला तोक में जंगली सूअरों के आतंक से किसान परेशान हैं। जंगली सूअरों ने क्षेत्र में किसानों की मेहनत पर पानी फेरते हुए करीब 10 नाली कृषि भूमि में खड़ी फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। इससे प्रभावित किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, जंगली सूअरों ने करीब 7 नाली जमीन में उगाई गई मंडुवा की फसल और 3 नाली जमीन में खड़ी धान की फसल को बर्बाद कर दिया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने दिन-रात मेहनत कर फसल तैयार की थी, लेकिन जंगली सूअरों के झुंड ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। फसल नष्ट होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।इस घटना से प्रभावित किसान दीपक चन्द्र नरियाल, माध्वा नन्द नरियाल, बंशीधर नरियाल और केशव दत्त नरियाल ने प्रशासन से जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।किसानों के अनुसार, उनकी कुल कृषि भूमि करीब 60 नाली है। जंगली सूअरों से फसलों को लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए उन्होंने पूरे प्रभावित क्षेत्र की सुरक्षा के लिए लगभग डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में तारबाड़ लगाने की मांग उठाई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा के उचित इंतजाम नहीं किए गए, तो भविष्य में भी उनकी फसलों को इसी तरह नुकसान पहुंच सकता है।वहीं, पटवारी भैगीनाखेत हिना खान ने भी मौके पर पहुंचकर नुकसान का निरीक्षण किया। अब प्रभावित किसानों को प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई और राहत मिलने की उम्मीद है।जिलाधिकारी से लगाई गुहारपीड़ित किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि फसलों को हुए नुकसान का उचित आकलन कर उन्हें जल्द मुआवजा दिया जाए। साथ ही, जंगली सूअरों से खेती को बचाने के लिए लगभग डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में तारबाड़ की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में किसानों की फसल सुरक्षित रह सके।किसानों का कहना है कि खेती उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में फसल बर्बाद होने से उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ भविष्य की खेती को लेकर भी चिंता सता रही है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन किसानों की इस समस्या पर कितनी जल्दी संज्ञान लेकर उन्हें राहत प्रदान करता है।

kamal bhandari editor in chief.

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