युवा कृषक कमल गिरी बने बागवानी के रोल मॉडल, जिलाधिकारी ने फार्म पहुंचकर की सराहना

जनपद चम्पावत के दूधपोखरा निवासी युवा कृषक कमल गिरी द्वारा बागवानी एवं बहुआयामी कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट एवं नवाचारी कार्यों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने उनके फार्म का स्थलीय निरीक्षण किया तथा विभिन्न गतिविधियों की विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने फार्म में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों, फसलों के विविधीकरण तथा स्वरोजगार के सफल मॉडल की सराहना की।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कमल गिरी से सेब, कीवी, तेजपत्ता, बड़ी इलायची सहित अन्य फसलों के उत्पादन, विपणन व्यवस्था एवं सरकारी योजनाओं से प्राप्त लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी ली।

कमल गिरी ने बताया कि उन्होंने उद्यान विभाग की एप्पल मिशन योजना के अंतर्गत अनुदान पर सेब के पौधे प्राप्त कर बागवानी की शुरुआत की। इसके साथ ही कीवी मिशन के माध्यम से कीवी उत्पादन को भी सफलतापूर्वक विकसित किया गया है।

उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में वे लगभग 15 नाली भूमि में 1000 से अधिक सेब के पेड़ों का उत्पादन कर रहे हैं, जिनसे उच्च गुणवत्ता के फल प्राप्त हो रहे हैं। इन फलों को वे 180 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से स्थानीय बाजार में विक्रय करते हैं, साथ ही उनके फार्म पर आने वाले पर्यटक स्वयं पेड़ों से फल तोड़कर खरीदने का अनुभव भी प्राप्त करते हैं, जिससे आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हुए हैं।

कमल गिरी द्वारा फार्म में बहुविध कृषि प्रणाली को अपनाते हुए पॉलीहाउस के माध्यम से सब्जी उत्पादन, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन (मौन पालन) एवं मछली पालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्याज़, काली हल्दी, तेजपत्ता, अदरक, आड़ू, पुलम, नींबू तथा कैमोमाइल चाय का उत्पादन भी किया जा रहा है, जिससे उन्हें वर्षभर आय प्राप्त हो रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि पॉलीहाउस निर्माण एवं तारबाड़/सोलर फेंसिंग की सुविधा मिलने से उनकी फसलों को जंगली जानवरों से सुरक्षा मिली है, जिससे उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई है। कमल गिरी ने जिलाधिकारी को सेब एवं कीवी उत्पादन की तकनीकी बारीकियों, मधुमक्खी पालन के महत्व तथा कृषि कार्यों में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं से भी अवगत कराया।

जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने कमल गिरी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के नवाचार, परिश्रम एवं वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित कृषि कार्य जनपद के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणादायी हैं। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार के क्षेत्र में इस तरह के सफल मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जिलाधिकारी ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे प्रगतिशील एवं सफल कृषकों को चिन्हित कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाए तथा अन्य इच्छुक किसानों को भी विभिन्न योजनाओं से जोड़ते हुए उन्हें प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग बागवानी एवं बहुआयामी कृषि को अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकें।

इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी श्री अशोक अधिकारी, श्री डेसमंड सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य उपस्थित रहे।

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