चंपावत। युवा लेखिका सपना भंडारी की सामाजिक–यथार्थवादी पुस्तक “मेरी कहानी” इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह उपन्यास आज के युवाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों के जीवन की वास्तविकताओं को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करता है।
लेखिका के अनुसार, यह पुस्तक कल्पना पर आधारित न होकर उन भावनाओं और संघर्षों से प्रेरित है, जिन्हें आज का युवा अपने जीवन में अनुभव करता है। उपन्यास की मुख्य पात्र काव्या आर्थिक तंगी, रिश्तों में दरार, शहर के अकेलेपन और आत्म-संदेह जैसी चुनौतियों से गुजरती है। कहानी केवल संघर्ष तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह दर्शाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति किस तरह खुद को संभाल सकता है।
पुस्तक का मुख्य संदेश है—
“टूटना कमजोरी नहीं है, और खुद का साथ न छोड़ना ही सबसे बड़ी ताकत है।”
वर्तमान समय में जब युवा मानसिक दबाव और अपेक्षाओं के बोझ से जूझ रहे हैं, यह किताब उन्हें यह एहसास दिलाती है कि वे अकेले नहीं हैं। “मेरी कहानी” किसी उपदेश की तरह नहीं, बल्कि एक आईने की तरह सामने आती है, जिसमें पाठक खुद को देख सकता है।
इसी क्रम में 25 अप्रैल 2026 को लेखिका ने जिलाधिकारी मनीष कुमार से मुलाकात कर उन्हें विमोचन समारोह के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान उन्हें पुस्तक की प्रति भी भेंट की गई। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया और कार्यक्रम में शामिल होने का आश्वासन दिया।
पुस्तक का भव्य विमोचन 4 मई 2026 को एसएसजे कैंपस, चंपावत में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी की उम्मीद है।
यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं, बल्कि उन अनकहे संघर्षों और भावनाओं को मंच देने का प्रयास होगा, जिन्हें लोग अक्सर अपने भीतर दबाकर रखते हैं।



