चंपावत ,
*’सेवा संकल्प अभियान’ के तहत चम्पावत में आयुर्वेद उत्कर्ष केंद्र एवं तीन दिवसीय ‘आयुष्कामीय शिविर’ का भव्य शुभारंभ; 773 रोगियों ने उठाया निःशुल्क आयुर्वेदिक उपचार का लाभ*
प्रदेश भर में 17 सितंबर से 18 अक्टूबर 2026 तक संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के क्रम में जिला प्रशासन एवं आयुष विभाग चम्पावत द्वारा 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर एक विशेष पहल की गई है। 23 सितंबर को राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर (महालक्ष्मी मार्केट, चम्पावत) को ‘आयुर्वेद उत्कर्ष केंद्र’ के रूप में उच्चीकृत करते हुए यहाँ तीन दिवसीय ‘आयुष्कामीय शिविर’ का विधिवत उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दर्जा राज्य मंत्री श्री श्याम नारायण पांडे, ब्लॉक प्रमुख चम्पावत श्रीमती अंचला बोरा, विधायक प्रतिनिधि श्री प्रकाश तिवारी, नगर पालिका परिषद की सभासद श्रीमती मणिप्रभा तिवारी, पतंजलि योग समिति के योगाचार्य श्री लोकमणि पंत, वरिष्ठ पत्रकार श्री गणेश पांडे, राजकीय नर्सिंग कॉलेज की प्रधानाचार्या श्रीमती रश्मि रावत, सभासद श्री नन्दन तड़ागी तथा भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्री कैलाश अधिकारी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर शिविर का शुभारंभ किया गया।जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह के निर्देशन में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य उच्चीकृत उत्कर्ष केंद्र में उपलब्ध विशेषज्ञ आयुर्वेदिक विधाओं का लाभ जन-जन तक सुगमता से पहुँचाना है। डॉ. प्रकाश सिंह ने आम जनमानस से सरकार द्वारा प्रदत्त इन अत्याधुनिक आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने और व्यापक प्रचार-प्रसार करने की अपील की। इस केंद्र की स्थापना से जनपद में मांसपेशीगत व्याधियों, संधिव्याधि (जोड़ों के रोग) तथा गुदागत रोगों का सुलभ आयुर्वेदिक उपचार उपलब्ध हो गया है। उत्कर्ष केंद्र में पंचकर्म (स्नेहन, नाड़ी स्वेदन, पत्र पिंड स्वेद, बालुका स्वेद, सर्वांग स्वेद), अग्निकर्म, जलौका चिकित्सा, आयुर्वेदिक न्यूरोथेरेपी, मर्म चिकित्सा तथा क्षारसूत्र चिकित्सा के माध्यम से पाइल्स, फिस्टुला और फिशर जैसी जटिल बीमारियों का प्रामाणिक इलाज किया जा रहा है।तीन दिवसीय आयुष्कामीय शिविर के अंतर्गत विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा काय चिकित्सा (सामान्य ओपीडी), शल्य चिकित्सा, शालाक्य (नाक, कान व गला रोग), बाल रोग, द्रव्यगुण (औषधीय पौधों का प्रदर्शन) तथा योग परामर्श जैसी प्रमुख शाखाओं के माध्यम से रोगियों का उपचार किया गया। शिविर में मरीजों का सबसे अधिक रुझान पंचकर्म, अग्निकर्म तथा जलौका चिकित्सा की ओर देखने को मिला, जबकि क्षारसूत्र पद्धति द्वारा अनेक रोगियों की स्क्रीनिंग कर उनका इलाज शुरू किया गया। इस अवसर पर राजकीय नर्सिंग महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने केंद्र का भ्रमण कर आयुर्वेदिक पद्धतियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और इस आधुनिक पहल की सराहना की।शिविर के दौरान पंचकर्म (स्नेहन-स्वेदन, सर्वांग स्वेद, शिरोधारा, बालू स्वेद), क्षारसूत्र, नेत्रतर्पण, नस्य, अग्निकर्म, जलौका, कायचिकित्सा, शल्य, बाल रोग, मर्म चिकित्सा, शालाक्य, प्रकृति परीक्षण एवं योग परामर्श के माध्यम से कुल 773 लाभार्थियों का सफलतापूर्वक उपचार एवं मार्गदर्शन किया गया।शिविर में आयुष विभाग के जिला होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक नागरकोटी, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. आनंद सिंह गुंसाई, राष्ट्रीय आयुष मिशन के जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुधाकर गंगवार, विभिन्न चिकित्साधिकारी डॉ. गिरेंद्र चौहान, डॉ. सुरेश कश्यप, डॉ. हर्ष पोखरिया, डॉ. नमिता अग्रवाल, डॉ. सुमन कनौजिया, डॉ. जेबा मलिक, डॉ. इकरा खान, डॉ. भाष्कर मेहंदीरत्ता, डॉ. मुंशी लाल गोले, डॉ. उमेश भारती, डॉ. अमरनाथ सिंह, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह, जिला फार्मेसी अधिकारी श्री भगवती प्रसाद खनसाली, होम्योपैथी चिकित्साधिकारी डॉ. कमल तथा समस्त फार्मेसी अधिकारियों व कर्मचारियों की सक्रिय उपस्थिति रही।
Kamal bhandari editor in chief ।

