चंपावत
उत्तराखण्ड माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली, 2011 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नियमावली के अंतर्गत दिए गए प्रावधानों के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि गठित समिति की प्रत्येक तीन माह में नियमित बैठक आयोजित की जाए। साथ ही, संबंधित विभाग को अधिनियम में वर्णित बिंदुओं के आधार पर प्रत्येक माह अपनी प्रगति रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में जिला समाज कल्याण अधिकारी को प्रस्तुत करेंगे, जिसे संकलित कर विभागाध्यक्ष को प्रेषित किया जाएगा।बैठक के दौरान उपखण्ड स्तर पर प्राप्त आवेदनों का निर्धारित समयांतर्गत त्वरित निस्तारण करने और अधिनियम के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों तथा माता-पिता (जैविक, दत्तक या सौतेले) को आहार, वस्त्र, निवास, चिकित्सा और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित कराना शासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि उपखण्ड स्तर पर उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में भरण-पोषण अधिकरण गठित हैं, जहाँ अधिकतम 10,000 रुपये प्रतिमाह तक भरण-पोषण धनराशि का प्रावधान है। यदि प्रतिपक्षी उपस्थित नहीं होता है, तो अधिकरण एकपक्षीय सुनवाई करते हुए आदेश जारी कर सकता है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वरिष्ठ नागरिकों की देख-रेख, स्वास्थ्य सुविधाओं, अमोद-प्रमोद केंद्रों की व्यवस्था तथा सुलह अधिकारियों के चयन की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरती जाए। वरिष्ठ जन अपने आवेदन सीधे जिला समाज कल्याण अधिकारी अथवा भरण-पोषण अधिकारी को उपलब्ध करा सकते हैं। प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वरिष्ठ नागरिकों एवं असहाय माता-पिता को समय पर न्याय और सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार की पूर्ण प्राप्ति हो।बैठक में उप जिलाधिकारी चंपावत विपिन चंद्र पंत, परियोजना निदेशक अजय सिंह, सहायक परियोजना निदेशक विमी जोशी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देवेश चौहान, जिला समाज कल्याण अधिकारी आर एस सामंत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व अन्य उपस्थित रहे।
Kamal bhandari editor in chief ।

