आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक, ई-ऑफिस को बढ़ावा देने पर जोर

आयुक्त एवं सचिव ने राजस्व विभाग के कार्यों की समीक्षा कर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद ने चम्पावत में राजस्व कार्यों एवं विकास योजनाओं की प्रगति का लिया जायजा

आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद उत्तराखण्ड श्रीमती रंजना राजगुरु ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में राजस्व विभाग के विभिन्न कार्यों एवं योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मुख्य देय एवं विविध देय के अंतर्गत राजस्व वसूली, जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में लंबित वादों, एल.आर. एक्ट के अंतर्गत दर्ज मामलों, अंश निर्धारण की प्रगति तथा विभाग में सृजित, कार्यरत एवं रिक्त पदों की स्थिति पर विस्तार से समीक्षा की गई।

आयुक्त एवं सचिव ने राजस्व न्यायालयों में लंबित पुराने वादों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश देते हुए कहा कि एल.आर. एक्ट के तहत छह माह से अधिक समय से लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली के अधिकाधिक उपयोग पर विशेष बल दिया।

बैठक के दौरान उन्होंने जनपद में एग्री स्टैक फार्मर रजिस्ट्री तथा अंश निर्धारण कार्यों की प्रगति की सराहना की। साथ ही अपर जिलाधिकारी को सृजित, कार्यरत एवं रिक्त पदों की अद्यतन सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि रिक्त पदों को शीघ्र भरे जाने की कार्यवाही की जा सके।

आयुक्त एवं सचिव ने कार्यालय एवं आवासीय परिसरों में मूलभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु शौचालय, जनसुविधाएं, वाटर कूलर तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए प्रस्ताव एवं आगणन तैयार कर शासन को प्रेषित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल का वातावरण बेहतर एवं सुविधायुक्त होना चाहिए।

बैठक में अपर जिलाधिकारी के.एन. गोस्वामी ने अवगत कराया कि जनपद में एल.आर. एक्ट के अंतर्गत दो वर्ष एवं एक वर्ष से अधिक पुराने कोई भी वाद लंबित नहीं हैं। वर्तमान में छह माह से अधिक अवधि के कुल आठ वाद लंबित हैं, जिनमें पूर्णागिरि तहसील में चार, पाटी में तीन तथा लोहाघाट में एक वाद शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि जनपद में उपजिलाधिकारी का एक, तहसीलदार के चार तथा नायब तहसीलदार के तीन पद रिक्त हैं।

इस अवसर पर जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने जनपद में संचालित विभिन्न नवाचारों एवं विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि मा. सर्वोच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मानकों के अनुरूप लिगेसी वेस्ट को शून्य करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। इसके अतिरिक्त पिरुल ब्रिकेटिंग यूनिट की स्थापना, कृषि भूमि की सुरक्षा हेतु ‘कृषि कवच’, ‘मेरा स्कूल मेरी जमीन’ अभियान के अंतर्गत विद्यालयों को भूमि उपलब्ध कराना, खिरद्वारी क्षेत्र में विद्युत सुविधा विस्तार तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे अनेक नवाचारात्मक कार्य संचालित किए जा रहे हैं।

आयुक्त एवं सचिव ने जनपद में किए जा रहे इन उल्लेखनीय कार्यों की सराहना करते हुए पंचकर्म केंद्र एवं वेलनेस सेंटर की स्थापना के लिए अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए।

बैठक के उपरांत आयुक्त एवं सचिव ने कलेक्ट्रेट परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने अभिलेखागार सहित विभिन्न पटलों का निरीक्षण कर अभिलेखों एवं रजिस्टरों की जांच की तथा ई-ऑफिस प्रणाली के अधिकतम उपयोग के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी को नियमित रूप से कार्यालयों का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए।

इसके पश्चात उन्होंने तहसील चम्पावत का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) हेतु स्थापित कंट्रोल रूम का अवलोकन किया तथा तहसील के विभिन्न पटलों का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।

बैठक एवं निरीक्षण कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी के.एन. गोस्वामी, उपजिलाधिकारी बी.पी. पंत, प्रमोद कुमार एवं नीतू डांगर सहित सभी तहसीलदार तथा कलेक्ट्रेट परिसर के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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