चम्पावत,
*मत्स्य पालन ने बदली रोहित महर की जिंदगी, आज प्रतिमाह ₹25 से ₹30 हजार की आय से बने आत्मनिर्भरता की मिसाल*
*सरकारी योजना का लाभ लेकर कठनौली के युवा ने अपनाया मत्स्य पालन, मेहनत और तकनीकी मार्गदर्शन से संवारा आजीविका का नया रास्ता*माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। सरकारी योजनाओं का लाभ जब मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के साथ जुड़ता है, तो वह न केवल किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति बदलता है, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार करता है। जनपद चम्पावत के ग्राम कठनौली निवासी युवा श्री रोहित सिंह महर की सफलता इसी बदलाव की प्रेरणादायी कहानी है।वर्ष 2022 में श्री रोहित महर ने मत्स्य पालन विभाग की योजना का लाभ लेते हुए मत्स्य पालन को अपनी आजीविका का माध्यम बनाने का निर्णय लिया। पारंपरिक रोजगार के सीमित अवसरों के बीच उन्होंने स्वरोजगार का यह क्षेत्र चुना और विभागीय सहायता से अपने प्रयासों को आगे बढ़ाया। योजना के अंतर्गत उन्हें 50 प्रतिशत सब्सिडी के माध्यम से क्लस्टर तालाब निर्माण के लिए सहायता प्राप्त हुई, जिससे मत्स्य उत्पादन को व्यवस्थित एवं व्यावसायिक रूप देने का अवसर मिला।शुरुआत में यह उनके लिए एक नए क्षेत्र में कदम रखने जैसा था, लेकिन प्रशिक्षण, विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया। मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए उन्होंने उत्पादन और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। इसके साथ ही बाजार से जुड़ाव मिलने से उत्पाद की बिक्री को भी बेहतर आधार मिला। धीरे-धीरे उनका छोटा सा प्रयास एक स्थायी आजीविका के रूप में विकसित होने लगा।आज श्री रोहित सिंह महर मत्स्य पालन के माध्यम से प्रतिमाह लगभग ₹25,000 से ₹30,000 तक की आय अर्जित कर रहे हैं। इस आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान की है और उन्हें अपने गांव में ही स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। उनका कहना है कि यदि इच्छाशक्ति, मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जाए तो पहाड़ों में भी स्वरोजगार के अनेक अवसर सृजित किए जा सकते हैं।रोहित महर की कहानी यह दर्शाती है कि पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए मत्स्य पालन केवल आजीविका का साधन ही नहीं, बल्कि स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम भी बन सकता है। सरकारी सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण और लाभार्थी की मेहनत के समन्वय से तैयार हुई यह सफलता आज अन्य युवाओं को भी अपने गांव और क्षेत्र में रहकर नए रोजगार अवसर तलाशने की प्रेरणा दे रही है।श्री रोहित महर की सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्र व्यक्ति तक पहुंचता है और लाभार्थी उसे मेहनत एवं नवाचार के साथ आगे बढ़ाता है, तो योजना का वास्तविक उद्देश्य धरातल पर साकार होता है। कठनौली के युवा रोहित महर आज अपने परिश्रम से न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए “अपने गांव में रहकर स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने” की एक प्रेरणादायी मिसाल भी बन चुके हैं।
kamal bhandari editor in chief ।

