मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड की ऐतिहासिक धरोहरों का हो रहा पुनरुद्धार

चम्पावत ,

*मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड की ऐतिहासिक धरोहरों का हो रहा पुनरुद्धार:

चंपावत स्थित 800 साल पुराने राजबुंगा किले का 4.91 करोड़ रुपये से होगा जीर्णोद्धार और सौंदर्यकरण**ऐतिहासिक राजबुंगा किले को प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करेगी राज्य सरकार, संग्रहालय, एम्फीथिएटर, आर्ट गैलरी और कैफे का होगा निर्माण*मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व एवं दूरदर्शी सोच के अंतर्गत उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में चंपावत स्थित लगभग 800 वर्ष पुराने ऐतिहासिक राजबुंगा किले के पुनरुद्धार और सौंदर्यकरण की एक बृहद योजना तैयार की गई है। *चंद राजवंश के राजा सोमचंद द्वारा निर्मित इस प्राचीन एवं ऐतिहासिक किले को राज्य सरकार एक भव्य पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने जा रही है, जिसका उद्देश्य स्थानीय संस्कृति और इतिहास को विश्व पटल पर पहचान दिलाना है।* मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में इस पूरी योजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली गई है, जिसकी कुल अनुमानित लागत लगभग 4.91 करोड़ रुपये (4,91,30,305 रुपये) तय की गई है। इस परियोजना के अंतर्गत प्राचीन किले के मूल स्वरूप का संरक्षण एवं पुनरुद्धार करते हुए यहां आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया जाएगा। इस मास्टर प्लान के तहत परिसर में चंपावत और कुमाऊं के समृद्ध इतिहास को प्रदर्शित करने वाला एक पुरातात्विक संग्रहालय, एक आर्ट एवं एग्जीबिशन गैलरी, ओपन-एयर एम्फीथिएटर, कैफे, टिकट काउंटर, सार्वजनिक सुविधाएं तथा सुंदर लैंडस्केप एवं वॉकवे पथ का निर्माण किया जाएगा। जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी निर्माण और जीर्णोद्धार कार्यों को पूरी गुणवत्ता और तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा मा. मुख्यमंत्री की इस पहल से न केवल कुमाऊं क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर पर्यटन को भारी बढ़ावा मिलेगा। इस नए पर्यटन केंद्र के विकसित होने से स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा चंपावत शहर की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

kamal bhandari editor in chief.

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