रेगडू गांव में धूमधाम से मनाया गया दशहरा महोत्सव, धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का दिखा संगम

रेगडू गांव में धूमधाम से मनाया गया दशहरा महोत्सव, धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का दिखा संगम

रेगडू

रेगडू गांव में विजयादशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर 20 अक्टूबर 2026 को दशहरा महोत्सव धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दशहरा महोत्सव कमेटी रेगडू के तत्वावधान में आयोजित इस मेले में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था, पारंपरिक संस्कृति और आपसी भाईचारे का सुंदर संगम देखने को मिला।दशहरा महोत्सव के अवसर पर गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा। मेले में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। ग्रामीणों ने देवी-देवताओं के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं, मेले में पहुंचे लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दशहरे का पर्व मनाया।देवी-देवताओं के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालुमहोत्सव के दौरान ग्रामीणों ने स्थानीय धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए देवी-देवताओं के दर्शन किए। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था प्रकट की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। मेले ने ग्रामीणों को एक-दूसरे से मिलने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर प्रदान किया।आयोजन समिति के प्रयासों से सफल हुआ महोत्सवदशहरा महोत्सव के सफल आयोजन में दशहरा महोत्सव कमेटी रेगडू के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति के अध्यक्ष दरवान सिंह मेहता, उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह मेहता, सचिव कृष्ण मोहन, महासचिव निर्मल सिंह मेहता, मेला संयोजक वीरेंद्र सिंह मेहता तथा सांस्कृतिक प्रमुख कन्हैया लाल और गणेश मेहता सहित अन्य सदस्यों ने आयोजन में सहयोग किया।वहीं, मुख्य संरक्षक प्रकाश सिंह मेहता, वासुदेव ओली और कल्याण सिंह मेहता सहित अन्य संरक्षकों एवं सदस्यों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।आयोजन में ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों की सहभागिता भी रही। इनमें ग्राम प्रधान गीता मेहता (रखोड़ा), राजकुमार (दयारतोली), सीमा मेहता (छिद्दा) और उषा मेहता (आगर) सहित क्षेत्र पंचायत सदस्य गोविंद सिंह मेहता का नाम प्रमुख रूप से शामिल रहा।सांस्कृतिक विरासत और भाईचारे का प्रतीक बना मेलादशहरा महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक भी बना। ऐसे पारंपरिक मेले क्षेत्र की लोक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग और उत्साह ने महोत्सव को यादगार बनाया। दशहरा पर्व ने एक बार फिर बुराई पर अच्छाई की जीत, सत्य की विजय और आपसी सद्भाव का संदेश दिया।रेगडू गांव में आयोजित दशहरा महोत्सव ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और ग्रामीण एकता की अनूठी मिसाल पेश की।

Kamal bhandari editor in chief.

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