सभी आवेदनकारी, घोषित हों राज्य आंदोलनकारी*— *उत्तराखंड के सभी जिलों में हो मामलों का निस्तारण*—- *सम्मान की लड़ाई,पेंशन नहीं,चाहिए ।

*सभी आवेदनकारी, घोषित हों राज्य आंदोलनकारी*— *उत्तराखंड के सभी जिलों में हो मामलों का निस्तारण*—- *सम्मान की लड़ाई,पेंशन नहीं,चाहिए

प्रमाणपत्र*~~~~~~~~~~~~~~~चम्पावत : उत्तराखंड प्रदेश के जिलाधिकारी दफ्तरों में जिसने भी राज्य आंदोलनकारी चिन्हीकरण को लेकर आवेदन किया हो,उन सभी को सरकार राज्य स्थापना दिवस से पूर्व राज्य आंदोलनकारी घोषित करे। ऐसा न होने पर प्रदेश भर के वंचित राज्य आंदोलनकारी सड़कों पर उतरकर अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे।यह बात वंचित राज्य आंदोलनकारी संगठन के जिलाध्यक्ष पत्रकार दिनेश पांडेय की अगुवाई में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष हुक्म सिंह कुंवर को मिले शिष्टमंडल ने उठाई। लोगों का कहना था कि राज्य की लड़ाई के साथ ही उस समय आरक्षण विरोधी,जिलागठन के भी आंदोलन चल रहे थे।जिस कारण तमाम विसंगतियां देखने को मिली। राज्य की लड़ाई लड़ रहे कुछ लोगों को आरक्षण विरोधी और जिला गठन से जोड़ दिया गया। जिस कारण कई वास्तविक आंदोलनकारी चिन्हीकरण से वंचित रह गए। जबकि उसके उलट राज्य आंदोलन का विरोध करने वाले और फर्जी टाइप के लोग चिंहित भी हो गए।वर्तमान में कई थानों में पुराने दस्तावेज न होने से भी आंदोलन के दौरान मिले पुलिस के प्रमाण पत्रों का भी सत्यापन नहीं हो पा रहा है और मामले पैंडिंग पड़े हैं।जिससे वास्तविक आंदोलनकारी में निराशा है।साथ ही पत्रकारों को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा देने की संस्तुति करते हुए पूर्व जिलाधिकारी अवनेंद्र नयाल ने शासन को पत्र भेजा था और उसके रिमांइडर कई दफा भेजे जा चुके हैं उस पर भी मामला लटका है।लिहाजा शासन स्तर पर ऐसी राजाज्ञा जारी हो जिसमें कहा जाय कि आवेदन की नियत तिथि तक अपना प्रत्यावेदन देने वाले सभी लोगों को राज्य आंदोलनकारी चिंहित किया जाता है। वंचितों का यह कहना है कि उन्हें पेंशन नहीं अपितु राज्य की लड़ाई का सर्टिफिकेट चाहिए क्योंकि उन्होंने राज्य‌ के लिए संघर्ष किया है।कुंवर ने वंचितों को भरोसा दिलाया है कि वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने इस मसले पर एक ड्राफ्ट रखेंगे और राज्य स्थापना दिवस से पूर्व कुछ न कुछ सार्थक हल निकलेगा। शिष्टमंडल में‌ वंचित राज्य आंदोलनकारी शेखर खोलिया, अशोक जोशी, आंदोलनकारी बहादुर फर्त्याल, शंकर पाण्डेय, एडवोकेट नरेश ढेक, ललित कुंवर आदि शामिल रहे।*********************

kamal bhandari editor in chief ।

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