संकल्प, सहयोग और सफलता: आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनीं स्वयं सहायता समूह की सदस्य ललिता”*

चम्पावत

*”संकल्प, सहयोग और सफलता: आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनीं स्वयं सहायता समूह की सदस्य ललिता”*

*”सीमित साधनों से सशक्त उद्यम तक: ग्रामोत्थान परियोजना ने बदली चम्पावत की ललिता उप्रेती की तकदीर”*यह कहानी है जनपद चंपावत के अंतर्गत विकासखण्ड चम्पावत के एक छोटे से गाँव मुड़ियानी की रहने वाली श्रीमती ललिता उप्रेती की है। श्रीमती ललिता गाँव में ही गठित ‘हिमालयन स्वयं सहायता समूह’ की एक सक्रिय सदस्य हैं, जो ग्रामोत्थान परियोजना द्वारा अनुबंधित ‘महिला विकास महिला संकुल संघ’ के अंतर्गत आता है। आज वह अपने क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की एक नई मिसाल बन चुकी हैं।परियोजना से जुड़ने से पहले, श्रीमती ललिता अपने गाँव में छोटे स्तर पर एक खुदरा (रिटेल) दुकान का संचालन कर रही थीं। इस दुकान से होने वाली मामूली आय से उनके परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति जैसे-तैसे हो पा रही थी। उनकी दुकान राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के किनारे स्थित थी, जो व्यवसाय के दृष्टिकोण से एक बहुत ही बेहतरीन स्थान था। इसके बावजूद, सीमित पूँजी, कम स्थान और उत्पादों की सीमित वैरायटी के कारण वह इस स्थान का पूरा लाभ नहीं उठा पा रही थीं। वह हमेशा से अपनी दुकान को आधुनिक रूप देकर ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देना चाहती थीं, लेकिन इसके लिए उन्हें वित्तीय सहयोग और सही तकनीकी मार्गदर्शन की सख्त आवश्यकता थी।श्रीमती ललिता के सपनों को उड़ान तब मिली जब अंतर्राष्ट्रीय कोष (IFAD) एवं केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित और राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘ग्रामोत्थान परियोजना’ (REAP) ने उनके गाँव में कदम रखा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (USRLM) तथा एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (ILSP) के माध्यम से ग्रामीण गरीब परिवारों की उद्यम आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देना और उनके पलायन को रोकना है। परियोजना की टीम ने गाँव मुड़ियानी में बैठकें आयोजित कीं, जिसमें श्रीमती ललिता को लघु उद्यम स्थापना योजना के बारे में पूरी जानकारी मिली। मानकों के अनुसार उनका चयन किया गया और आवश्यक दस्तावेज तैयार कर भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई।ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से श्रीमती ललिता को कुल 1 लाख रुपये की लागत से अपने खुदरा व्यवसाय (रिटेल शॉप) को बड़े स्तर पर स्थापित करने का अवसर मिला। इस उद्यम की वित्तीय संरचना में उनका खुद का अंशदान 20,000 रुपये था, जबकि बैंक ऋण के रूप में 50,000 रुपये और परियोजना सहायता के रूप में 30,000 रुपये का महत्वपूर्ण वित्तीय सहयोग मिला। इस पूँजी की मदद से उन्होंने अपनी पुरानी छोटी दुकान का विस्तार किया और उसे एक व्यवस्थित तथा बहुउद्देशीय रिटेल स्टोर के रूप में विकसित कर दिया।सफलता की ओर बढ़ते कदमआधुनिक स्टोर बनने के बाद श्रीमती ललिता ने ग्राहकों की जरूरत को समझते हुए दुकान में दैनिक उपयोग की वस्तुओं और खाद्य उत्पादों की रेंज बढ़ा दी। अब उनकी दुकान पर दूध, दही, पनीर जैसे डेयरी उत्पाद, आटा, चावल, किराना सामग्री और घरेलू उपयोग की अन्य आवश्यक वस्तुएं हर समय उपलब्ध रहने लगीं। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुकान होने का फायदा उठाते हुए उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों और वहां से गुजरने वाले यात्रियों के लिए ताजा खाद्य पदार्थ जैसे चाय, पकौड़ा, समोसा और चाउमीन की बिक्री भी शुरू कर दी। अपने गुणवत्तापूर्ण उत्पादों, उचित मूल्य और ग्राहकों के साथ मधुर व्यवहार के कारण उनका व्यवसाय दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला गया। आज उनकी दुकान न केवल दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन है, बल्कि स्वादिष्ट नाश्ते के लिए भी पूरे क्षेत्र में एक भरोसेमंद केंद्र बन चुकी है।वर्तमान में श्रीमती ललिता अपनी इस रिटेल शॉप से सभी खर्चों को वहन करने के बाद हर महीने लगभग 15 हजार रुपये से 20 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। इस अच्छी आमदनी से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सुदृढ़ हो गई है, उनके जीवन स्तर में बड़ा सुधार आया है और उनका पूरा परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। श्रीमती ललिता की यह शानदार सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही समय पर वित्तीय सहयोग, उचित मार्गदर्शन और अवसर प्रदान किया जाए, तो वे सीमित संसाधनों के बावजूद एक सफल उद्यमी बन सकती हैं। ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के सहयोग से ललिता उप्रेती ने यह साबित कर दिखाया है कि अटूट संकल्प, कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन के समन्वय से ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर भारत के सपने को हकीकत में बदला जा सकता है।

kamal bhandari in chief ।

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