विशेष न्यायालयों में प्रभावी पैरवी के लिए अभियोजकों के कार्यों का हुआ विभाजन*

चम्पावत,

*विशेष न्यायालयों में प्रभावी पैरवी के लिए अभियोजकों के कार्यों का हुआ विभाजन*

*श्रीमती दीपा रानी लोक अभियोजक /विशेष लोक अभियोजक नामित, गंभीर एवं विशेष मामलों की पैरवी को मिलेगी मजबूती*जनपद चम्पावत में विशेष न्यायालयों में चल रहे मामलों की नियमित और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने अभियोजकों के बीच कार्यों का स्पष्ट विभाजन किया है। साथ ही 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुकी लोक अभियोजक श्रीमती दीपा रानी को विशेष लोक अभियोजक नामित किया गया है। इस व्यवस्था से अलग-अलग मामलों की जिम्मेदारी स्पष्ट रहेगी और किसी अभियोजक के अवकाश अथवा जनपद से बाहर रहने पर भी न्यायालय में सरकारी पक्ष की पैरवी प्रभावित नहीं होगी।उत्तराखण्ड शासन के गृह अनुभाग-3 द्वारा जारी निर्देशों के क्रम में यह व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य विशेष न्यायालयों में चल रहे पॉक्सो, एससी/एसटी, भ्रष्टाचार निरोधक एवं एनडीपीएस जैसे महत्वपूर्ण मामलों में मजबूत और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना है।जारी आदेश के अनुसार जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) श्री विद्याधर जोशी भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत सत्र परीक्षण वादों की पैरवी करेंगे। इसके साथ ही वह थाना टनकपुर एवं थाना बनबसा के एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामलों को भी देखेंगे।लोक अभियोजक/विशेष लोक अभियोजक श्रीमती दीपा रानी पॉक्सो, एससी/एसटी अधिनियम, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम एवं अन्य विशेष न्यायालयों से संबंधित मामलों की पैरवी करेंगी। इसके अतिरिक्त वह कोतवाली चम्पावत एवं थाना लोहाघाट के एनडीपीएस अधिनियम से संबंधित मामलों की भी पैरवी करेंगी।वहीं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी)/विशेष लोक पॉक्सो अभियोजक श्री कुन्दन सिंह भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत सत्र परीक्षण वादों के साथ थाना पाटी, कोतवाली पंचेश्वर, थाना रीठा एवं थाना तामली के एनडीपीएस अधिनियम से संबंधित मामलों की पैरवी करेंगे।अभियोजन कार्य लगातार चलता रहे, इसके लिए लिंक अभियोजकों की व्यवस्था भी की गई है। श्री विद्याधर जोशी एवं श्री कुन्दन सिंह एक-दूसरे के लिंक अभियोजक होंगे, जबकि श्रीमती दीपा रानी के लिंक अभियोजक श्री कुन्दन सिंह होंगे। किसी अभियोजक के अवकाश पर रहने या जनपद से बाहर होने की स्थिति में लिंक अभियोजक संबंधित मामलों की पैरवी करेंगे।इस व्यवस्था से विशेष एवं गंभीर मामलों में सरकारी पक्ष की पैरवी और मजबूत होगी। प्रत्येक अभियोजक की जिम्मेदारी स्पष्ट होने से मामलों की नियमित सुनवाई में सहायता मिलेगी तथा न्यायालय में समय पर आवश्यक तथ्य एवं साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकेंगे। साथ ही किसी अभियोजक की अनुपस्थिति में लिंक अभियोजक के माध्यम से पैरवी जारी रहने से न्यायालयी कार्य प्रभावित नहीं होगा। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से जुड़े मामलों सहित अन्य गंभीर प्रकरणों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित होगी।जिलाधिकारी द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

Kamal bhandari editor in chief ।

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