बालेश्वर मंदिर धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिव पुराण कथा में गूंजा सनातन का संदेश… नशामुक्त समाज और सौहार्द का लिया संकल्प!

“चम्पावत के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध बालेश्वर मंदिर में सावन माह के पावन अवसर पर आयोजित शिव पुराण कथा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज़ क्षेत्रों से पहुंचे भक्तों ने शिव महिमा का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। कथा के माध्यम से समाज को नशामुक्त बनाने, आपसी प्रेम और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी दिया गया।चम्पावत के प्राचीन एवं आस्था के प्रमुख केंद्र बालेश्वर मंदिर में मंदिर समिति द्वारा आयोजित शिव पुराण कथा इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बनी हुई है। कथा में जिले ही नहीं बल्कि दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर भगवान शिव की महिमा का श्रवण किया और भक्ति में सराबोर होकर शिवमय वातावरण का अनुभव किया।मंदिर समिति के अध्यक्ष देवीलाल वर्मा ने कहा कि आज समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए ऐसे धार्मिक आयोजनों की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिव पुराण जैसी कथाएं लोगों में प्रेम, सद्भाव, नैतिक मूल्यों और सनातन धर्म के प्रति आस्था को मजबूत करती हैं।मंदिर समिति के सदस्य विकास शाह एवं अन्य सदस्यों ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में व्याप्त द्वेष, नशे की लत और सामाजिक बुराइयों को दूर कर लोगों में आपसी समन्वय और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना भी है। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना भी इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।हरिद्वार से पधारे कथा व्यास ने अपने प्रवचन में कहा कि शिव पुराण का श्रवण केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक संदेश को जीवन में उतारना ही सच्ची साधना है। उन्होंने कहा कि समाज को नशामुक्त बनाना, आपसी सौहार्द बनाए रखना और सनातन संस्कृति के संस्कारों को जन-जन तक पहुंचाना हम सभी का कर्तव्य है।शिव पुराण कथा के दौरान पूरा बालेश्वर मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। कथा में शामिल श्रद्धालु भक्ति के रंग में रंगे नजर आए और भगवान शिव की आराधना में झूम उठे।सावन के पावन महीने में बालेश्वर मंदिर में आयोजित शिव पुराण कथा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने और संस्कारों से जोड़ने का भी सशक्त माध्यम हैं।

kamal bhandari editor in chief ।

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