रामलीला के षष्ठम दिवस राजा दशरथ के निधन का समाचार सुन भावुक हुए राम,

रामलीला के षष्ठम दिवस राजा दशरथ के निधन का समाचार सुन भावुक हुए राम,

लक्ष्मण और सीताभरत-मिलाप और राम के करुण विलाप के मंचन ने दर्शकों की आंखें की नम, भावुक हुआ पूरा रामलीला पंडालशुक्रवार को रामलीला मंचन के षष्ठम दिवस पर राजा दशरथ के स्वर्गवास का समाचार सुनकर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के मूर्छित होने तथा उनके करुण विलाप के मार्मिक दृश्य का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के शानदार अभिनय ने उपस्थित दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। पूरे रामलीला पंडाल में भावुकता का माहौल देखने को मिला।षष्ठम दिवस की रामलीला की अध्यक्षता रमेश चंद्र जोशी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में दीवान सिंह बिष्ट मौजूद रहे। मंचन के दौरान भरत और शत्रुघ्न के ननिहाल से अयोध्या लौटने पर माता कैकेयी ने उन्हें राजा दशरथ के स्वर्गवास की सूचना दी। इसके बाद गुरु वशिष्ठ से परामर्श लेकर भरत भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता को यह दुखद समाचार देने वन पहुंचे। पिता के निधन का समाचार सुनते ही श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के मूर्छित होने तथा श्रीराम के विलाप के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं, शत्रुघ्न द्वारा मंथरा को लात मारने के दृश्य ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।राम की भूमिका में कुमारी साक्षी महराना, लक्ष्मण की भूमिका में शीतल भट्ट और सीता की भूमिका में सोनू महराना ने अपने सशक्त अभिनय और मार्मिक विलाप से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से रामायण के इस हृदयस्पर्शी प्रसंग को जीवंत कर दिया।रामलीला का निर्देशन मोहन जोशी ने किया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर सांस्कृतिक कला केंद्र गोली-बिरगुल के दलनायक रमेश राम टम्टा, तबला वादक भीम लाल, राजेंद्र सिंह महराना, अंबादत्त जोशी, नवीन सिंह महराना, अशोक सिंह बिष्ट, मीडिया प्रभारी दीपक शर्मा, पंडित सुरेश चंद्र जोशी, कुंदन सिंह बिष्ट, जगदीश जोशी, बंटी महराना, बृजेश, दिनेश जोशी, विजय महराना, जीवन सिंह महराना, भुवन बिष्ट सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। कुमारी डौली बोहरा ने मेकअप की जिम्मेदारी निभाते हुए महत्वपूर्ण योगदान दिया।रामलीला के इस मार्मिक प्रसंग ने दर्शकों को पारिवारिक प्रेम, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा का संदेश दिया। कलाकारों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और आयोजन से जुड़े लोगों के सहयोग से षष्ठम दिवस का मंचन यादगार रहा।

kamal bhandari editor in chief.

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