विशेष संवाददाता, चम्पावत दिनांक: 23 मई, 2026
चम्पावत। उत्तराखंड के चम्पावत जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक बेहद गंभीर मामले की सुनवाई करते हुए अभियुक्त आनंद सिंह मेहरा और बब्लू राम की प्रथम जमानत याचिका (सं0-46/2026) को सिरे से खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए टिप्पणी की कि राजनीतिक स्वार्थसिद्धि के लिए एक नाबालिग बालिका को मोहरा बनाकर आपराधिक षड्यंत्र रचना अत्यंत गंभीर प्रकृति का अपराध है।विशेष सत्र न्यायाधीश (POCSO Act) / सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल की अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और चल रही विवेचना का हवाला देते हुए अभियुक्तों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया।घटना को सनसनीखेज बनाने का प्रयास, जांच में मिले पुख्ता डिजिटल साक्ष्य अदालत ने अपने आदेश में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि पॉक्सो (POCSO) जैसे अत्यंत संवेदनशील मामलों में जहां पर्याप्त संजीदगी और गोपनीयता बरतने का दायित्व होता है, वहीं इस मामले में एफआईआर दर्ज होने से पहले ही घटना को जानबूझकर सनसनीखेज रूप दिया गया।
विवेचना अधिकारी द्वारा अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के अनुसार:
सोशल मीडिया और मोबाइल डेटा: अभियुक्त आनंद सिंह मेहरा के सोशल मीडिया अकाउंट से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए हैं।
रिसाइकिल बिन से बरामद वीडियो: सह-अभियुक्त बब्लू राम के मोबाइल फोन की जांच में घटना से जुड़े कई फोटोग्राफ और वीडियोग्राफ मिले हैं। इसमें सबसे अहम साक्ष्य 4 मई, 2026 का एक वीडियो है, जिसे बब्लू राम के मोबाइल के ‘रिसाइकिल बिन’ से रिकवर किया गया है। इस वीडियो में अभियुक्त कमल रावत, अर्जिता राय, बब्लू राम और पीड़िता एक साथ उपस्थित दिखाई दे रहे हैं।
पीछा कर बनाई गई तस्वीरें: जांच में यह भी सामने आया कि 5 मई, 2026 को जब पीड़िता मुकदमे के नामजद अभियुक्त विनोद रावत के साथ स्कूटी से जा रही थी, तब बब्लू राम और कमल रावत ने कार से उनका पीछा किया और उनकी तस्वीरें व वीडियो बनाए।
आपराधिक षड्यंत्र की प्रबल आशंका: कोर्ट
न्यायालय ने कहा कि वर्तमान में मुकदमा अपराध संख्या (मु०अ०सं०) 14/2026, 15/2026 और 16/2026 की विवेचना अभी प्रचलित (जारी) है। अब तक की जांच के आधार पर प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि पीड़िता के साथ कथित घटना को मनगढ़ंत रूप से रचने में कमल रावत और अर्जिता राय की मुख्य भूमिका थी। साथ ही, आनंद सिंह मेहरा और बब्लू राम की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि जांच अभी शुरुआती और महत्वपूर्ण चरण में है, इसलिए इस स्तर पर अभियुक्तों को जमानत दिए जाने से विवेचना (जांच) प्रभावित हो सकती है।
इन गंभीर धाराओं में दर्ज है मुकदमा-
बता दें कि थाना कोतवाली चम्पावत में दोनों अभियुक्तों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2) [criminal conspiracy], 217, 230, 351(2), 353(1)(ख) तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 की धारा 11/12 और 22/23 के तहत मुकदमा पंजीकृत है।जेल अधीक्षक के माध्यम से तामील होगा आदेशन्यायालय ने अपने आदेश की प्रति जिला कारागार पिथौरागढ़ के जेल अधीक्षक के माध्यम से तत्काल दोनों अभियुक्तों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जमानत प्रार्थना पत्र की पत्रावली को मूल एफआईआर (मु०अ०सं०-16/2026) के साथ संलग्न करने का आदेश जारी किया है।
स्रोतः विशेष सत्र न्यायालय (पॉक्सो) / सत्र न्यायाधीश, चम्पावत, आदेश दिनांक 23.05.2026।

