चम्पावत में महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपी गई 20 केंद्रों की भूमि
मा0 मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप चम्पावत में अतिक्रमण मुक्त अभियान तेज
चंपावत। जनपद चम्पावत के अंतर्गत संचालित ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र जिनके भवन निर्माण के लिए विभागीय भूमि उपलब्ध नहीं थी, उन केंद्रों के लिए लोक प्रयोजन के दृष्टिगत शासन द्वारा शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन ‘महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखण्ड शासन’ के नाम निःशुल्क हस्तान्तरण व नामान्तरण की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की मंशा के अनुरूप और शासन के निर्देशों के क्रम में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राजकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न हो। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनपद में ऐसे स्थानों को लगातार चिन्हित किया जा रहा है जहाँ अतिक्रमण की संभावना है, ताकि उन्हें तत्काल हटाया जा सके।
इसी अभियान के तहत जिला प्रशासन द्वारा कार्रवाई करते हुए वर्तमान तक जनपद के 358 विद्यालयों की भूमि को राजस्व अभिलेखों में पूरी तरह दुरुस्त कर लिया गया है। इसके साथ ही गुरुवार को जनपद के विभिन्न विकास खंडों में स्थित 20 आंगनबाड़ी केंद्रों का विधिवत नामान्तरण कर उससे संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित कर दिए गए हैं।
जिसमें विकासखंड चंपावत अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र राकड़ीफुलारा, जूपपटवा, खर्ककार्की(1), खर्ककार्की(2), विकासखंड लोहाघाट अंतर्गत नई बलाई, भूमलाई, रायकोट (2), डूंगरी पऊ, खेतकुनी, रोलधौन, खिलपति, डनगाव, डूंगाबोरा, मझेड़ा, झालनदेव, कोलीडेक तथा आगर (2) के अतिरिक्त विकासखंड बाराकोट अंतर्गत जिण्डी, लुवाकोट तथा लीवू आंगनबाड़ी केंद्रों को स्वयं की भूमि प्राप्त हो गई है
इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में सभी सरकारी कार्यालयों को उनके भू-अभिलेख पूरी शुद्धता और स्पष्टता के साथ प्राप्त हो रहे हैं, जिससे भविष्य में होने वाले किसी भी प्रकार के अतिक्रमण और वाद-विवाद से पूरी तरह बचा जा सकेगा। जिलाधिकारी ने इस अभियान को जनपद में एक बेहद सकारात्मक और अच्छी पहल बताते हुए कहा कि आने वाले समय में भी इस अभियान को निरंतर चलाकर शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने का पुरजोर प्रयास किया जाएगा।

