पलायन रोकने और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने के मा मुख्यमंत्री के विजन को साकार करती ‘ग्रामोत्थान योजना’, जानकी देवी बनीं गाँव की प्रेरणा*

चम्पावत

पहाड़ में आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से ‘वेदिका समूह’ की जानकी देवी बनीं प्रेरणा*माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के “सशक्त उत्तराखंड” के संकल्प, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने के विजन का धरातल पर व्यापक असर दिखने लगा है।उत्तराखंड के जनपद चम्पावत के विकासखण्ड चम्पावत के अंतर्गत ग्राम मुड़यानी की रहने वाली श्रीमती जानकी देवी ‘वेदिका स्वयं सहायता समूह’ की एक सक्रिय सदस्य हैं। यह समूह ग्रामोत्थान परियोजना द्वारा अनुबंधित महिला विकास संकुल संघ के अधीन कार्य करता है। अपनी आजीविका चलाने और परिवार के भरण-पोषण के लिए जानकी देवी पहले भी पारंपरिक रूप से गाय पालन का कार्य करती थीं। हालांकि, उनके पास पहाड़ी नस्ल की गाय होने के कारण दूध का उत्पादन बहुत कम होता था। वह दूध केवल अपने परिवार के उपभोग के लिए ही उपयोग कर पाती थीं। उनके मन में हमेशा यह इच्छा थी कि वह एक अच्छी नस्ल की गाय खरीद सकें ताकि अतिरिक्त दूध को बाजार में बेचकर अपनी आमदनी बढ़ा सकें, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वह नई गाय खरीदने में असमर्थ थीं।उनकी इस लाचारी को दूर करने में अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास निधि (IFAD) द्वारा वित्त पोषित और उत्तराखण्ड ग्राम्य विकास समिति (UGVS) द्वारा संचालित ‘ग्रामोत्थान परियोजना’ ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (USRLM) और एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (ILSP) के माध्यम से ग्रामीण गरीब परिवारों की उद्यमिता आधारित आजीविका में वृद्धि करना तथा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर पलायन रोकना है। समूह की बैठकों के माध्यम से जब जानकी देवी को परियोजना द्वारा संचालित व्यक्तिगत उद्यम और ब्याज मुक्त ऋण की जानकारी मिली, तो उन्होंने नई गाय खरीदकर डेयरी आजीविका शुरू करने की इच्छा जताई। इसके बाद परियोजना की टीम ने उनके घर जाकर भौतिक सत्यापन किया और आवश्यक दस्तावेज एकत्र कर उद्यम स्थापित करने के लिए कुल एक लाख रुपये की व्यवस्था की गई, जिसमें परियोजना के नियमानुसार 30 हजार रुपये की अनुदान धनराशि दी गई और 50 हजार रुपये का बैंक ऋण स्वीकृत कराया गया, जबकि शेष 20 हजार रुपये की धनराशि जानकी देवी ने लाभार्थी अंशदान के रूप में स्वयं वहन की। इस वित्तीय सहयोग से उन्होंने एक अच्छी नस्ल की गाय खरीदी। कुछ ही समय में उनका यह छोटा सा प्रयास एक नियमित आय के स्रोत में तब्दील हो गया। वर्तमान में उनकी इस डेयरी इकाई से प्रतिदिन लगभग 10 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। अपने परिवार की पोषण आवश्यकताओं के लिए रोजाना 1 से 2 लीटर दूध रखने के बाद, वह शेष बचे दूध को स्थानीय डेयरी और आसपास के परिवारों को 40 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचती हैं।इस व्यवसाय से अब उन्हें हर महीने लगभग 5 हजार से 6 हजार रुपये की अतिरिक्त शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। यह बढ़ी हुई आमदनी न केवल उनके परिवार के लिए बेहतर पोषण का जरिया बनी है, बल्कि इसने उनके बच्चों के सुरक्षित भविष्य और स्वयं उनके आत्मविश्वास को एक सुदृढ़ आधार दिया है। वर्तमान में जानकी देवी अपने पूरे गाँव में महिला उद्यमिता की एक अनूठी और प्रेरक मिसाल बन चुकी हैं। उनकी यह यात्रा स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही समय पर वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और उचित अवसर प्रदान किए जाएं, तो वे स्थानीय संसाधनों के बूते एक सफल और टिकाऊ उद्यम खड़ा कर सकती हैं। ग्रामोत्थान परियोजना ने उन्हें न सिर्फ आर्थिक संबल दिया है, बल्कि समाज में आत्मनिर्भरता, सम्मान और एक बेहतर भविष्य की नई दिशा भी दिखाई है।

Kamal Bhandari editor in chief।

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