चंपावत
*माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के ‘सशक्त नारी, समृद्ध राज्य’ के विजन को धरातल पर उतार रही हैं चम्पावत की रेशमा देवी*
*धरातल पर दिख रहा मा. मुख्यमंत्री का विजन: एनआरएलएम और दृढ़ संकल्प से ‘लखपति दीदी’ बनने की ओर अग्रसर रेशमा देवी**महिला स्वावलंबन की मिसाल: मा. मुख्यमंत्री की योजनाओं के सहारे रेशमा देवी ने तय किया संघर्ष से सफलता का सफर* प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट विजन है कि जब राज्य की नारी आत्मनिर्भर और सशक्त होगी, तभी एक समृद्ध और अग्रणी उत्तराखंड का निर्माण संभव है। राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को स्वावलंबी बनाने, स्व-रोजगार से जोड़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाने के लिए चलाए जा रहे अभियानों का असर धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। चम्पावत जिले के विकास खंड चंपावत के फागपुर गाँव की निवासी रेशमा देवी की सफलता की यात्रा मुख्यमंत्री जी की इसी सोच और प्राथमिकताओं का एक जीवंत उदाहरण है।एक एकल महिला होने के नाते रेशमा देवी के कंधों पर अपने चार बच्चों के लालन-पालन और भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी अकेले थी। बेहद सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी और अपने परिवार को बेहतर भविष्य देने का संकल्प लिया। उनकी इस हिम्मत को संबल तब मिला जब 15 जुलाई 2017 को गाँव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर ‘जागृति महिला स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया गया, जिसमें उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें सर्वसम्मति से समूह का अध्यक्ष चुना गया।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़कर रेशमा देवी ने कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त किया और वैज्ञानिक तरीके से साबुन बनाने का हुनर सीखा। इसके बाद समूह को प्राप्त 50,000 रुपये के बैंक क्रेडिट लिंकेज (CCL) ऋण की मदद से उन्होंने साबुन और अचार निर्माण का कार्य शुरू किया। उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों की स्थानीय बाजार के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा आयोजित ‘सरस मेलों’ में भारी मांग रहने लगी, जिससे समूह की आय में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। रेशमा देवी ने अपने साथ-साथ समूह की 10 अन्य महिलाओं को भी अचार बनाने का प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसरों से जोड़ा।अपनी आजीविका का विस्तार करते हुए रेशमा देवी ने पशुपालन को अपनाया और 4 गायों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 12 लीटर दूध बाजार में बेचकर अपनी आय को और मजबूत किया। उनकी इसी लगन और कार्यकुशलता के फलस्वरूप उन्हें एनआरएलएम के तहत ‘बैंक सखी’ के रूप में भी जिम्मेदारी मिली, जहाँ वे ग्रामीण क्षेत्र में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रही हैं। आज रेशमा देवी विभिन्न माध्यमों से प्रति माह लगभग 25,000 रुपये की सम्मानजनक आय अर्जित कर अपने परिवार का कुशलतापूर्वक पालन-पोषण कर रही हैं।माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का निरंतर यह प्रयास रहा है कि राज्य की अंतिम पंक्ति में खड़ी महिला को भी सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिले और वे स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ‘लखपति दीदी’ के रूप में स्थापित हों। रेशमा देवी की यह प्रेरक कहानी न केवल चम्पावत बल्कि पूरे प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबन और महिला सशक्तीकरण की एक नई दिशा तय कर रही है।
kamal bhandari editor in chief ।

