बागेश्वर में डीएम अपूर्वा पाण्डे सख्त, बच्चों की सुरक्षा से लेकर जल संरक्षण और दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा एक्शन
ड्रॉपआउट बच्चों की होगी पहचान, चार नौलों की डीपीआर मंजूर, पशु औषधियों के आठ नमूने जांच के लिए संकलितबागेश्वर। जिले में बाल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण और पशु औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे की अध्यक्षता में बाल संरक्षण और जल संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठकों में योजनाओं की समीक्षा की गई, वहीं पशुपालन विभाग के केंद्रीय औषधि भंडार का भी निरीक्षण किया गया।बाल संरक्षण समिति की बैठक में डीएम ने स्कूलों में बच्चों को शारीरिक दंड देने के मामलों की जांच के लिए संयुक्त निरीक्षण समिति गठित करने और विद्यालय छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उनके कारणों सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। पॉक्सो पीड़ित बच्चों की गोपनीयता और गरिमा बनाए रखने के साथ त्वरित सहायता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। वहीं, मिशन वात्सल्य के तहत 12 बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।उधर, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में चार धारा-नौलों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर को स्वीकृति दी गई। साथ ही धारी नदी के कैचमेंट क्षेत्र को उपचार कार्यों के लिए पहली प्राथमिकता पर चुना गया, जिससे जल स्रोतों के संवर्धन और नदी के पुनर्जीवीकरण को बढ़ावा मिल सके।वहीं, पशुपालन विभाग के केंद्रीय औषधि भंडार के निरीक्षण के दौरान औषधि निरीक्षक पूजा रानी ने दवाओं के स्टॉक, भंडारण और अभिलेखों की जांच की। इस दौरान आठ औषधि नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए संकलित किए गए। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।जिला प्रशासन का फोकस बच्चों की सुरक्षा, प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और पशुधन के बेहतर उपचार के लिए गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर है
kamal bhandari editor in chief.

