लंदन में गूंजी उत्तराखंड की लोकधुन, 400 से अधिक दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

लंदन में गूंजी उत्तराखंड की लोकधुन, 400 से अधिक दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

फौजी ललित मोहन जोशी, प्रियंका मेहर और सौरभ मित्तानी ने बांधा समां; मुख्यमंत्री धामी के संदेश ने बढ़ाया आयोजन का गौरवलंदन, 6 अक्टूबर।उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पहाड़ की माटी की खुशबू सात समंदर पार लंदन में भी महसूस की गई। 5 अक्टूबर को आयोजित भव्य सांस्कृतिक समारोह में कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी लोकसंगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने 400 से अधिक दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। फौजी ललित मोहन जोशी, प्रियंका मेहर और सौरभ मित्तानी ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा माहौल उत्तराखंडमय हो उठा।हजारों किलोमीटर दूर लंदन में बसे उत्तराखंडी समुदाय के लिए यह आयोजन महज एक संगीत कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, बोली-भाषा, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से दोबारा जुड़ने का भावुक अवसर बन गया। पहाड़ की पारंपरिक धुनों और लोकगीतों के साथ आधुनिक संगीत का संगम दर्शकों को खूब पसंद आया।पहाड़ की धुनों से सराबोर हुआ लंदनकार्यक्रम में उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंगीत परंपरा की विविध छटा देखने को मिली। भारतीय सेना में सेवा देने के साथ दो दशकों से अधिक समय से संगीत के क्षेत्र में सक्रिय फौजी ललित मोहन जोशी ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत और लोकजीवन की झलक पेश की। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को उत्तराखंड की मिट्टी और पहाड़ों की यादों से जोड़ दिया।वहीं प्रियंका मेहर ने अपनी लोकप्रिय शैली और पारंपरिक लोकधुनों के आधुनिक अंदाज से युवा दर्शकों को खास तौर पर आकर्षित किया। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि लोकसंगीत को नई पीढ़ी से जोड़कर उसे वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है।सौरभ मित्तानी ने भी अपने गीतों और प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। तीनों कलाकारों ने मिलकर उत्तराखंड के संगीत की अलग-अलग शैलियों और पीढ़ियों को एक मंच पर प्रस्तुत किया।मुख्यमंत्री धामी का संदेश बना खास आकर्षणकार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विशेष वीडियो संदेश रहा। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड कौतिक 2026 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं और विदेशों में रह रहे उत्तराखंडियों द्वारा अपनी संस्कृति, परंपराओं और पहचान को जीवंत रखने के प्रयासों की सराहना की।मुख्यमंत्री का संदेश लंदन में मौजूद उत्तराखंडी समुदाय के लिए गर्व और भावनात्मक जुड़ाव का खास क्षण रहा। दर्शकों ने संदेश का स्वागत उत्साह के साथ किया।प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी मिट्टी से जोड़ने की पहलकार्यक्रम का आयोजन दीपक धामी ने किया, जबकि इसकी मेजबानी एनडी कलेक्टिव के मैनेजिंग डायरेक्टर निशाद सिंह कन्याल और संस्थापक एवं क्रिएटिव डायरेक्टर दीक्षा राठौर ने की।इस अवसर पर दीक्षा राठौर ने कहा कि लंदन जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर में उत्तराखंड के संगीत और संस्कृति को इतने बड़े स्तर पर प्रस्तुत होते देखना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों से दूर रह रहे लोगों के लिए संगीत अपनी मिट्टी और जड़ों से जुड़ने का बेहद सशक्त माध्यम है। उत्तराखंड की संस्कृति भौगोलिक सीमाओं से कहीं आगे तक पहुंच सकती है और ऐसे आयोजन इस सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।लोकसंगीत ने पार की भौगोलिक सीमाएंलंदन में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह भी साबित किया कि उत्तराखंड का लोकसंगीत अब केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं है। नई पीढ़ी के कलाकार पारंपरिक धुनों, क्षेत्रीय भाषाओं और लोकशैलियों को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचा रहे हैं।कार्यक्रम में 400 से अधिक लोगों की मौजूदगी ने प्रवासी उत्तराखंडियों के बीच अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं के प्रति गहरे लगाव को भी उजागर किया।कुल मिलाकर, 5 अक्टूबर की शाम लंदन में उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के नाम रही। फौजी ललित मोहन जोशी, प्रियंका मेहर और सौरभ मित्तानी की प्रस्तुतियों ने जहां दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संदेश ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।पहाड़ों से हजारों किलोमीटर दूर लंदन में गूंजती उत्तराखंड की लोकधुनों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अपनी मिट्टी, अपनी भाषा और अपनी संस्कृति से जुड़ाव की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती।

kamal bhandari editor in chief

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