चम्पावत,
जिला चिकित्सालय, चम्पावत में संचालित डायलिसिस यूनिट के शनिवार को बंद पाए जाने के संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि यूनिट में निर्धारित मरीजों की डायलिसिस प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक स्टरलाइजेशन की प्रक्रिया पूर्ण कर कक्ष को बंद किया गया था।मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि शनिवार को डायलिसिस के लिए कुल पांच मरीज पूर्व से पंजीकृत थे। इनमें एक मरीज के पैर में फ्रैक्चर होने के कारण उसका उपचार चंदन अस्पताल, हल्द्वानी में चल रहा है, जबकि एक अन्य मरीज श्री राममूर्ति, बरेली में गुर्दा रोग विशेषज्ञ से चिकित्सकीय परामर्श हेतु गए हुए थे।उन्होंने बताया कि शेष तीन मरीजों की डायलिसिस निर्धारित समय के अनुसार प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक सफलतापूर्वक संपन्न की गई। डायलिसिस प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत प्रातः 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक डायलिसिस मशीनों एवं कक्ष का आवश्यक स्टरलाइजेशन किया गया। स्टरलाइजेशन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद डायलिसिस कक्ष को बंद किया गया।मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि शनिवार को निर्धारित मरीजों में से उपचाराधीन एवं चिकित्सकीय परामर्श के लिए बाहर गए मरीजों को छोड़कर उपस्थित सभी मरीजों की डायलिसिस निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार की गई। यूनिट को बंद किए जाने का कारण डायलिसिस प्रक्रिया के बाद आवश्यक स्वच्छता एवं स्टरलाइजेशन प्रक्रिया को पूरा करना था।उन्होंने बताया कि स्टरलाइजेशन (Sterilization) एक पूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से किसी वस्तु, उपकरण अथवा सतह पर मौजूद बैक्टीरिया, वायरस, कवक तथा उनके बीजाणु (Spores) सहित सभी प्रकार के सूक्ष्मजीवों को पूरी तरह नष्ट या समाप्त किया जाता है। डायलिसिस जैसी संवेदनशील चिकित्सा प्रक्रिया में संक्रमण की रोकथाम और मरीजों की सुरक्षा के लिए उपकरणों एवं संबंधित कक्ष का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्टरलाइजेशन अत्यंत आवश्यक है।मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण और निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
kamal bhandari editor in chief ।

