श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भिंगराड़ा में आस्था का महासंगम ।
ऐतिहासिक एडी बालकृष्ण मेले में उमड़ा जनसैलाबपाटी के भिंगराड़ा में तीन दिवसीय मेले की धूम… एडी देवता के डोले ने बढ़ाई धार्मिक आस्था की रौनक, नैनीताल समेत दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुचंपावत। लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र के पाटी ब्लॉक के भिंगराड़ा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय एडी बालकृष्ण मेला इन दिनों आस्था, संस्कृति, परंपरा और मनोरंजन का बड़ा केंद्र बना हुआ है। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले इस मेले में चंपावत ही नहीं, बल्कि नैनीताल जनपद समेत आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।मेले के दौरान दो गांवों से एडी देवता की भव्य झांकी और डोला निकाला जाता है। विभिन्न स्थानों की परिक्रमा कराने के बाद डोले को विधि-विधान के साथ एडी देवता के मंदिर परिसर में स्थापित किया जाता है। धार्मिक परंपराओं के बीच पूरा क्षेत्र एडी देवता के जयकारों से गूंज उठता है।1982 में शुरू हुआ था ऐतिहासिक मेलाएडी बालकृष्ण मेले का इतिहास करीब चार दशक पुराना है। वर्ष 1982 में तत्कालीन रेंजर बालकृष्ण जोशी के प्रयासों से मेले की शुरुआत हुई थी, जबकि पाटी के प्रथम ब्लॉक प्रमुख शंकर सिंह अधिकारी ने इसकी नींव रखी थी। तब से हर वर्ष यह मेला पूरे उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित किया जाता है।इस वर्ष भी मेला कमेटी द्वारा आयोजन को भव्य रूप दिया गया है। दर्जा राज्य मंत्री एवं मेला कमेटी के अध्यक्ष मुकेश सिंह महराना स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। मेला कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं और आगंतुकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।ग्राम प्रधान और जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिकाग्राम सभा की प्रधान गीता भट्ट द्वारा भी मेले और ग्राम सभा की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधि भी व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।वहीं पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं, जिससे मेला शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो रहा है।लोहे के बर्तन और स्थानीय उत्पाद बने आकर्षणमेले में धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिल रहा है। बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। पारंपरिक लोहे के बर्तन, बच्चों के खिलौने, महिलाओं के कपड़े और स्थानीय उत्पादों की दुकानें लोगों को आकर्षित कर रही हैं।मेले में अलग-अलग स्टॉल और दुकानें सजी हुई हैं। स्थानीय व्यापारियों के चेहरों पर भी अच्छी बिक्री को लेकर उत्साह नजर आ रहा है। स्थानीय उत्पादों और कारोबार को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।सांस्कृतिक संध्या में झूम रहे क्षेत्रवासीदिन में धार्मिक कार्यक्रम और मेले की रौनक तो रात में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का रंग देखने को मिल रहा है। क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में सांस्कृतिक संध्या में पहुंचकर लोक संस्कृति और मनोरंजन का आनंद उठा रहे हैं।जिलाधिकारी मनीष कुमार ने पहुंचकर बढ़ाई मेले की शोभाचंपावत के जिलाधिकारी मनीष कुमार भी भिंगराड़ा मेले में पहुंचे। उन्होंने मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और क्षेत्रवासियों का अभिवादन स्वीकार किया। जिलाधिकारी ने एडी देवता के मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, सुख-शांति और खुशहाली की कामना की।जिलाधिकारी ने मेले की भव्यता की सराहना की। जिला प्रशासन का प्रयास है कि दूरस्थ क्षेत्रों में भी सांस्कृतिक आयोजन हों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शहरी क्षेत्रों की तरह मनोरंजन एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।मेला कमेटी ने जताया आभारमेला कमेटी के अध्यक्ष मुकेश सिंह महराना ने सभी क्षेत्रवासियों को मेले की शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। वहीं ग्राम प्रधान गीता भट्ट ने मेले को सफल बनाने में सहयोग के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस प्रशासन, सभी जनप्रतिनिधियों, मेला कमेटी और क्षेत्र की समस्त जनता का हार्दिक आभार जताया।क्षेत्र के पत्रकार दीपक शर्मा ने बताया कि एडी बालकृष्ण मेला हर वर्ष भव्यता के साथ आयोजित होता है और इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के मौके पर भिंगराड़ा का यह ऐतिहासिक मेला आज आस्था और संस्कृति के साथ-साथ स्थानीय व्यापार और लोक मनोरंजन का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। एडी देवता के जयकारों से गूंजता भिंगराड़ा और मेले में उमड़ती भीड़ इस आयोजन की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को बखूबी बयां कर रही है।
kamal bhandari editor in chief ।

