चम्पावत में फलदार पेड़ों से झड़ रहे फल, किसानों का फूटा गुस्सा—उद्यान और कृषि विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप
चम्पावत। जनपद चम्पावत में फलदार वृक्षों से समय से पहले फल झड़ने की समस्या ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का आरोप है कि उद्यान विभाग और कृषि विभाग की उदासीनता व जानकारी के अभाव में फलदार पेड़ों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। पेड़ों में फूल आने के बाद फल तैयार तो हो रहा है, लेकिन 5 से 15 दिनों के भीतर ही फल जमीन पर गिर जा रहा है, जिससे किसानों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते विभाग द्वारा उचित जानकारी, दवा, तकनीकी सलाह और प्रशिक्षण दिया जाता, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। किसानों ने आरोप लगाया कि विभाग केवल कागजों तक सीमित नजर आते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी सहायता दिखाई नहीं देती।
किसानों का दर्द अब आक्रोश में बदलता दिख रहा है। कई किसानों ने भावुक होकर कहा कि “इन पेड़ों को बच्चों की तरह पाला, लेकिन जब फल ही नहीं बच रहा तो मन करता है कि इन्हें काट दें। पेड़ों की हालत देखकर कभी-कभी रोना आता है।”
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जिले से बागेश्वर सहित अन्य स्थानों पर किवी और फलदार वृक्षों की ट्रेनिंग के लिए लोगों को भेजा जाता है, लेकिन जो लोग ‘मास्टर ट्रेनर’ बनकर लौटते हैं, वे अपने अनुभव और तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाने के बजाय अपने तक ही सीमित रखते हैं। किसानों का कहना है कि प्रशिक्षण प्राप्त लोगों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और उन्हें गांवों में जाकर अन्य किसानों को भी आधुनिक तकनीक और बचाव के उपाय सिखाने चाहिए।
किसान भैरव दत्त जोशी निकट विकासखंड कार्यालय चंपावत तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि विशेषज्ञ टीम गांवों में भेजी जाए, फल झड़ने के कारणों की जांच हो और किसानों को समय पर सही मार्गदर्शन व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि बागवानी को बचाया जा सके और किसानों की मेहनत बर्बाद होने से रोकी जा सके।
“पेड़ों से गिरते फलों के साथ टूट रही किसानों की उम्मीदें, अब प्रशासन से न्याय की आस”
“फल आने से पहले ही उजड़ रहे किसानों के सपने!”

