मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के सहयोग से ‘मंगलदीप मिस्ठान भंडार’ के रूप में शुरू हुआ यह सफर बना आत्मनिर्भरता की एक बड़ी मिसाल*

चंपावत

*”मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के सहयोग से ‘मंगलदीप मिस्ठान भंडार’ के रूप में शुरू हुआ यह सफर बना आत्मनिर्भरता की एक बड़ी मिसाल*

उत्तराखंड के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चलाई जा रही ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’ आज धरातल पर वरदान साबित हो रही है। इस योजना ने न केवल युवाओं के पलायन को रोका है, बल्कि उन्हें अपने ही घर-आँगन में रोजगार के नए अवसर प्रदान कर स्वावलंबी बनाया है। इसी महत्वाकांक्षी योजना की बदौलत जनपद चम्पावत के एक साधारण युवा श्री धन नाथ गोस्वामी ने सफलता की एक ऐसी नई इबारत लिखी है, जो आज क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बेहतरीन स्रोत बन चुकी है।चम्पावत के छतार इलाके में रहने वाले धन नाथ गोस्वामी हमेशा से अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते थे, लेकिन वित्तीय संसाधनों की कमी उनके सपनों के आड़े आ रही थी। ऐसे समय में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना उनके लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर आई। उन्होंने योजना के अंतर्गत ₹3 लाख का ऋण प्राप्त किया और बिना समय गंवाए छतार में ‘मंगलदीप मिस्ठान भंडार एवं भोजनालय’ नाम से अपने होटल व्यवसाय की नींव रखी।अपने इस नए उद्यम को और अधिक आकर्षक और बहुमुखी बनाने के लिए धन नाथ ने इसमें अपनी पूरी लगन झोंक दी। उन्होंने भोजनालय में आने वाले ग्राहकों के लिए न केवल स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की, बल्कि शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हुए तरह-तरह की मिठाइयों का काम भी शुरू किया। भोजन और मिठाइयों के इसी बेहतरीन स्वाद और शुद्धता ने बहुत जल्द ही उनके होटल को स्थानीय लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।सरकार से मिली वित्तीय सहायता और खुद की दिन-रात की कड़ी मेहनत के बल पर आज उनका यह व्यवसाय बेहद सफलतापूर्वक चल रहा है। इस उद्यम से वे वर्तमान में ₹30 से ₹35 हजार प्रतिमाह की शानदार आय अर्जित कर रहे हैं। इस स्वरोजगार ने न केवल उनकी आर्थिकी को बेहद सुदृढ़ और मजबूत किया है, बल्कि अब वे अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण बेहद सम्मानजनक और खुशहाल ढंग से कर रहे हैं। धन नाथ गोस्वामी की यह सफलता साबित करती है कि अगर सही दिशा में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जाए और दृढ़ संकल्प के साथ मेहनत की जाए, तो पहाड़ों में भी सफलता की मीठी खुशबू बिखेरी जा सकती है ।

kamal bhandari editor in chief।

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