“अपना स्कूल, अपनी ज़मीन” अभियान से विद्यालयों को मिल रही मजबूत कानूनी पहचान

219 विद्यालयों का भूमि सुदृढ़ीकरण पूर्ण, 145 में प्रक्रिया तेज—शिक्षा परिसरों को अतिक्रमण से बचाने की बड़ी पहल

जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार की अभिनव पहल “अपना स्कूल, अपनी ज़मीन” अभियान के तहत जनपद चम्पावत में राजकीय विद्यालयों की भूमि को सुरक्षित और विधिक रूप से सुदृढ़ बनाने का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। अभियान का उद्देश्य विद्यालयों को अतिक्रमण से सुरक्षित रखना, भूमि विवादों को समाप्त करना तथा प्रत्येक विद्यालय को स्पष्ट कानूनी स्वामित्व प्रदान करना है।

प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी मान सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित कुल 646 विद्यालयों की भूमि के स्वामित्व निर्धारण हेतु राजस्व एवं शिक्षा विभाग के बीच समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।

माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत कुल 105 विद्यालयों में से 77 विद्यालयों को रजिस्ट्री/दाननामा के साथ दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूर्ण कराई जा चुकी है। इनमें विकासखंड बाराकोट के 15, पाटी के 24, लोहाघाट के 14 तथा चम्पावत के 24 विद्यालय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 20 माध्यमिक विद्यालयों के प्रकरण तहसील स्तर पर परीक्षणाधीन हैं, जिनमें भूमि का विधिवत अंकन विद्यालय के नाम सुनिश्चित किया जा रहा है व अन्य 8 विद्यालयों में भी तेज़ी से कार्य किया जा रहा है।

प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। कुल 541 प्राथमिक विद्यालयों में से 142 विद्यालयों के पास पूर्ण रजिस्ट्री एवं दाखिल-खारिज की पुष्टि हो चुकी है। वहीं 156 विद्यालयों में रजिस्ट्री / दाननामा उपलब्ध है तथा दाखिल-खारिज की प्रक्रिया जारी है। इसके अतिरिक्त 125 विद्यालयों के प्रकरण तहसील स्तर पर नोटिस के माध्यम से अग्रसारित किए गए हैं।

जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने कहा कि तहसील स्तर पर चल रही परीक्षण एवं वैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जनपद का प्रत्येक विद्यालय अपनी स्वयं की भूमि पर सुरक्षित एवं गौरवपूर्ण रूप से स्थापित हो सके।

उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान की गति को बनाए रखते हुए समयबद्ध रूप से सभी लंबित प्रकरणों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल अभिलेखों के सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी शिक्षण संस्थानों के सुरक्षित और स्थायी भविष्य की मजबूत आधारशिला है।

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