खेत बचाओ अभियान: चंपावत के गांवों में आयोजित शिविरों में किसानों को दी गई जैविक खेती और गोबर खाद के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी*

चम्पावत

*खेत बचाओ अभियान: चंपावत के गांवों में आयोजित शिविरों में किसानों को दी गई जैविक खेती और गोबर खाद के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी*

माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व तथा मार्गदर्शन में जनपद चंपावत के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत व्यापक जन जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को ग्राम करौली गांव और ग्राम कुड़ में विशेष शिविरों एवं कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी श्रीमती वसुंधरा गर्बयाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य किसानों को टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।करौली गांव में आयोजित शिविर के दौरान कृषि, उद्यान एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों द्वारा किसानों को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न लाभार्थीपरक योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही, ग्राम कुड़ में आयोजित जन जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को गोबर खाद के महत्व और उसके वैज्ञानिक उपयोग के बारे में विस्तार से समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि गोबर खाद केवल एक सामान्य जैविक उर्वरक नहीं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता एवं उसके समग्र स्वास्थ्य को दीर्घकाल तक बनाए रखने का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम है।कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि गोबर खाद के नियमित उपयोग से भूमि में जैविक कार्बन की मात्रा में वृद्धि होती है, मिट्टी की जल धारण क्षमता में सुधार होता है और रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता कम होती है। किसानों को पशुधन से प्राप्त गोबर का वैज्ञानिक तरीके से खाद तैयार कर खेतों में उपयोग करने हेतु प्रेरित किया गया, जिससे खेती की लागत कम होगी, कृषि उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।किसानों को यह भी संदेश दिया गया कि समृद्ध पशुधन और जैविक खाद ही सुरक्षित खेत और समृद्ध किसान की असली आधारशिला हैं। इसके अलावा, शिविरों में वर्मी कम्पोस्ट, प्राकृतिक खेती तथा गोबर खाद के उन्नत एवं वैज्ञानिक उपयोग से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं।

Kamal bhandari editor in chief.

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