अब महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर” : एकल, विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को सरकार देगी ₹1.50 लाख तक का अनुदान, गाँव में ही मिलेगा रोजगार ।

चम्पावत

उत्तराखंड सरकार ने एकल, विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के तहत पात्र महिलाओं को ₹2 लाख तक की परियोजना पर 75 प्रतिशत यानी अधिकतम ₹1.50 लाख का अनुदान प्रदान किया जाएगा। इस योजना के लिए 14 अगस्त 2026 तक आवेदन किए जा सकते हैं।जिला कार्यक्रम अधिकारी पी.सी. बृजवाल ने बताया कि महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को उनके गाँव और स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें।योजना के तहत कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, खाद्य प्रसंस्करण, कैंटीन, बुटीक, ब्यूटी पार्लर, कंप्यूटर कार्य, जनरल स्टोर सहित कई प्रकार के स्वरोजगार स्थापित किए जा सकते हैं। अधिकतम ₹2 लाख की परियोजना पर 75 प्रतिशत सरकारी अनुदान मिलेगा, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि लाभार्थी को स्वयं वहन करनी होगी।योजना का लाभ उत्तराखंड की 21 से 50 वर्ष आयु की मूल एवं स्थायी निवासी महिलाओं को मिलेगा। इसमें एकल, विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा, किन्नर, एसिड अटैक एवं अपराध पीड़ित महिलाओं तथा अकेले बच्चों का पालन-पोषण करने वाली माताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। परिवार की वार्षिक आय ₹72,000 या उससे कम होना अनिवार्य है।जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि आवेदन की अंतिम तिथि 14 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन पत्र का प्रारूप विभागीय वेबसाइट से डाउनलोड कर पंजीकृत डाक के माध्यम से ही जिला कार्यक्रम कार्यालय, बाल विकास, चम्पावत भेजना होगा। अन्य किसी माध्यम से प्राप्त आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।उन्होंने जनपद की सभी पात्र महिलाओं से समय रहते आवेदन करने की अपील करते हुए कहा कि यह योजना महिलाओं को अपने ही गाँव में रोजगार स्थापित कर आत्मनिर्भर बनने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी।”उत्तराखंड की महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी… अब आत्मनिर्भर बनने का सपना होगा साकार। सरकार दे रही है ₹2 लाख तक की परियोजनाओं पर 75 प्रतिशत अनुदान। कौन कर सकता है आवेदन, क्या हैं पात्रता और कब है अंतिम तारीख… देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट।”

kamal bhandari editor in chief ।

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