“डॉक्टरों का बड़ा आरोप! दो पत्रकारों पर मानसिक दबाव और छवि धूमिल करने का आरोप, जांच की उठी मांग”
चम्पावत से इस वक्त की बड़ी खबर… जिला अस्पताल में डॉक्टरों और दो स्थानीय पत्रकारों के बीच विवाद गहरा गया है। प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ ने दो पत्रकारों पर चिकित्सकों पर अनावश्यक मानसिक एवं सामाजिक दबाव बनाने तथा अस्पताल की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया है। विरोध में डॉक्टरों ने ओपीडी का लगभग 30 मिनट तक बहिष्कार किया और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।चम्पावत जिला अस्पताल में चिकित्सकों और दो स्थानीय पत्रकारों के बीच विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. धनंजय पाठक के नेतृत्व में चिकित्सकों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि दो स्थानीय पत्रकार लगातार चिकित्सकों पर अनावश्यक मानसिक एवं सामाजिक दबाव बना रहे हैं तथा बिना पर्याप्त तथ्यों के अस्पताल की कार्यप्रणाली को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।चिकित्सकों का कहना है कि 18 जुलाई को दोनों पत्रकार अस्पताल पहुंचे और बिना पूरी तथ्यात्मक जानकारी के चिकित्सा व्यवस्था को गलत तरीके से दिखाने की बात कही, जिससे अस्पताल का कार्य वातावरण प्रभावित हुआ। विरोध स्वरूप डॉक्टरों ने करीब 30 मिनट तक ओपीडी का बहिष्कार किया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।उधर, आरोपों के घेरे में आए सूरी पंत और नंदू पांडेय ने डॉक्टरों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वे एक मरीज को एमआरआई सुविधा नहीं मिलने के मामले में तथ्यात्मक जानकारी लेने अस्पताल पहुंचे थे। पत्रकारों का आरोप है कि जानकारी देने के बजाय उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कानूनी और तथ्यात्मक रूप से अपना पक्ष रखेंगे तथा जनहित के मुद्दे उठाते रहेंगे।फिलहाल दोनों पक्ष स्वयं को सही बता रहे हैं और निष्पक्ष प्रशासनिक जांच की मांग कर रहे हैं। अब पूरे मामले में जिला प्रशासन की जांच और उसके निष्कर्ष पर सभी की निगाहें टिकी हैं।चम्पावत जिला अस्पताल से जुड़े इस विवाद में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की सच्चाई प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। तब तक किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
Kamal Bhandari editor in chief ।

