जनपद में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। चम्पावत ब्लॉक की एएनएम (ANM) और आशा फैसिलिटेटर्स के साथ हुई इस बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO) डॉ. इंद्रजीत पाण्डेय ने की।
बैठक को संबोधित करते हुए एसीएमओ डॉ. इंद्रजीत पाण्डेय ने फील्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों को सख्त निर्देश दिए कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि घर पर होने वाले प्रसव में जोखिम अधिक होता है, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक प्रसव अस्पताल में ही हो। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे चिन्हित गर्भवती महिलाओं की सूची बनाकर उनका नियमित फॉलो-अप करें।
बैठक में उपस्थित स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक मजूमदार ने एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने गर्भावस्था के दौरान होने वाली एएनसी (Antenatal Care) जाँच के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि समय पर जाँच होने से प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को पहले ही पहचाना जा सकता है। डॉ. मजूमदार ने कहा कि “संस्थागत प्रसव केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि माँ और नवजात शिशु के जीवन की सुरक्षा की गारंटी है। एएनएम का दायित्व है कि वे उच्च जोखिम वाली गर्भधारण (High-Risk Pregnancy) की पहचान करें और उन्हें समय पर उच्च स्वास्थ्य केंद्रों के लिए संदर्भित करें।”
बैठक के दौरान ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों और उनके समाधान पर भी चर्चा हुई। आशा फैसिलिटेटर्स को निर्देशित किया गया कि वे अपने क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न योजनाओं और प्रोत्साहनों की जानकारी जन-जन तक पहुँचाएँ।
इस बैठक का मुख्य लक्ष्य चम्पावत ब्लॉक में मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम स्तर पर लाना है। बैठक में जिला कार्यक्रम प्रबंधक गौरव पाण्डेय, जिला डाटा प्रबंधक दिनेश थ्वाल, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक संजय बोहरा, विनोद बोहरा, जिला, अमित बिष्ट, प्रदीप कार्की, दीपक बोहरा सहित स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

