चम्पावत। जनपद चम्पावत के जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। ताजा मामला एक गर्भवती महिला से जुड़ा है, जिसे दो दिनों तक जिला अस्पताल में भर्ती रखने के बाद बीती रात लगभग 11 बजे अचानक यह कहकर रेफर कर दिया गया कि मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान को खतरा है और तत्काल उच्च केंद्र ले जाना आवश्यक है। परिजनों के अनुसार आनन-फानन में रात करीब 12 बजे निजी वाहन बुक कर महिला को हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया।
लेकिन वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि महिला और गर्भस्थ शिशु पूरी तरह सुरक्षित हैं, प्रसव की निर्धारित तिथि भी अभी नहीं आई है तथा फिलहाल भर्ती की कोई आवश्यकता नहीं है। चिकित्सकों ने महिला को एक सप्ताह बाद पुनः जांच कराने की सलाह देते हुए घर भेज दिया।
इस पूरे घटनाक्रम से परिजनों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि स्थिति सामान्य थी तो आखिर इतनी गंभीर बात कहकर आधी रात में रेफर क्यों किया गया? गरीब परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान होने के साथ-साथ वाहन का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ा।
जनपद के लोगों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या चम्पावत जिला अस्पताल धीरे-धीरे उपचार केंद्र के बजाय केवल रेफर सेंटर बनता जा रहा है? यदि मरीजों को बिना ठोस चिकित्सीय कारण के रेफर किया जा रहा है, तो यह गंभीर जांच का विषय है। जनता ने माननीय जिलाधिकारी महोदय से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित चिकित्सकीय अभिलेखों की समीक्षा करने तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार कार्मिकों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
नोट: यह समाचार परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। प्रशासनिक जांच के बाद ही तथ्यों की अंतिम पुष्टि हो सकेगी।

